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Swami Vivekananda Biography in Hindi | स्वामी विवेकानंद जीवन परिचय

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Swami Vivekanand Biography in Hindi | स्वामी विवेकानंद जिवन परिचय

Swami Vivekanand एक ऐसे इंसान थे जिसने लोगो की सोच को काफी बदला, कहने का मतलब है की स्वामी विवेकानंद जो पहले और आज कल धर्म भेदभाव जैसी चीजें चलती आ रही है उसमे वो बिलकुल मानते नही थे, उसने कहा की सभी धर्म भगवान के पास पहुंचने के लिए एक रास्ते है जिसको हमने आदर करना चाइए (उदाहरण -जब कोई महल में जाने के लिए काफी सारे रास्ते होते है, ऐसे भगवान के पास पहुंच ने के लिए काफी सारे धर्म होते है) ये सोच थी महान स्वामी विवेकानंद की।

Swami Vivekanand Biography in Hindi
Swami Vivekanand

आज स्वामी विवेकानंद का जन्म दिवस है तो इसीके चलते हम Swami Vivekanand के शुरू से लेकर उसने जब अंतिम सांस लिए तब की उसकी कहानी को हम बारीकी से जानने की कोशिश करते है।

Basic Information (सामान्य जानकारी) :

नामस्वामी विवेकानंद
वास्विक नाम नरेंद्रनाथ
जन्म 12 जनवरी, 1863
जन्म स्थल कोलकाता , पश्चिम बंगाल
मृत्यु4 जुलाई,1902 बेलूर मठ (बंगाल)
उम्र 39 साल
गुरु श्री रामकृष्ण

Swami Vivekanand Biography in Hindi (स्वामी विवेकानंद जीवन परिचय) :

Born and Family (जन्म और परिवार) :

Swami Vivekanand का जन्म 12 जनवरी, 1863 कोलकाता पश्चिम बंगाल में हुआ था, उसके पिताजी का नाम विश्व नाथ दत्ता था जो की कोलकाता में हाईकोर्ट ऐडवोकेट के रूप में काम करते थे, उसके माताजी का नाम भुवनेश्वरी देवी था जो की भगवान, धर्म, कहने का मतलब है की वो बहुत धार्मिक बाबतो में मानते थे।

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माताजी भगवान को काफी प्रार्थना करते थे की उसको एक बच्चा हो जो की अपने घर का नाम आगे करे। 12 जनवरी, 1863 को मकरसंक्रांति के दिन उसके यहां एक पुत्र का जन्म हुआ जो की थी स्वामी जी , परिवार ने उसका नाम नरेंद्र नाथ रखा, माताजी और उसका परिवार काफी खुश हुआ।

स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद

स्वामि जी के पिताजी पहले से ही काफी धर्म भेदभाव जैसी चीज में वो मानते नही थे, वो एडवोकेट थे तो उसकी के चलते वो ऐसी चीज पर काफी सवाल उठाया करते थे। स्वामी जी एक दिन उसके पिताजी के ऑफिस में गए वहा पर उसने दो पाइप के बॉक्स देखे जो की एक हिंदू के लिए था और एक मुस्लिम के लिए था, और उसने वो दो बॉक्स को एक कर दिया, जिसकी वजह से उसके पिताजी ने स्वामी जी को काफी डाट दिया, पर उसका मानना था की हिंदू मुस्लिम सब एक ही है आप ने उसको अलग अलग क्यू रखा है।

Swami Vivekanand Monk Life (साधुरूपी जीवन की शुरुआत) :

स्वामी स्वामी जी बहुत शांत स्वभाव के थे, उसने एक बार बैठकर सोचा कि मुझे आगे क्या करना है तभी उसको पता चला कि मुझे दुनिया की मोह माया में कोई ज्यादा रस नहीं है इसके लिए मैं एक साधु के रूप में पूरा जीवन बिताऊंगा। यहां से स्वामी जी ने एक साधु रूप जीवन शुरु कर दिया।

अब स्वामी जी को एक ऐसे इंसान की जरूरत थी जो उसको भगवान के पास कैसे पहुंचे उसका रास्ता सही से दिखा पाए, तब थोड़े दिन के बाद उसकी मुलाकात श्री राम कृष्ण साधु के साथ हुई।

जब राम कृष्ण ने स्वामी जी की बातों को सुना तो उसका लगा की ये लड़का दुसरो से काफी अलग विचार रखता है तो फिर उसने उसको अपना शिष्य बना लिया।

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काफी सारे साधु श्री राम कृष्ण के पास शिक्षा लेने के लिए आते थे, पर जब राम कृष्ण का देहांत हो गया तब पूरी की पूरी जवाबदारी स्वामी जी के ऊपर आ पड़ी, स्वामी जी ने सभी साधुओं को थोड़ी बहुत शिक्षा देना शुरू किया, उसके पास जितना भी ज्ञान था वो सब को देने लगे उसने काफी दूसरे देशों के कैलचर के बारेमे भी बताना शुरू कर दिया।

स्वामी जी के पास एक कटोरा था और उसके साथ वो पूरे भारत की प्रदक्षिणा करने के लिए आगे चले, स्वामी जी पहले वाराणसी पहुंचे, उसके ये जगह काफी पसंद आई और उसने यह बहुत समय तक आराधना, योग, और मेडिटेशन किया। उसके बाद वो श्री राम जी के निवास अयोध्या गए

जब वो जाते थे तब एक इंसान के पास उसने पाइप (देशी भाषा में सलम, हुक्का) मांगा तो इस व्यक्ति ने वो स्वामी जी को देने के लिए साफ साफ मना कर दिया और जब स्वामी जी ने उसको पूछा कि क्यू नही दे रहा है तो उसने बताया की में मुस्लिम हु और तुम हिन्दू हो तो फिर में आपको क्यू दू,। ये बात स्वामी जी के जेहन में बिल्कुल पची नहीं।

स्वामी विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद

स्वामी जी बचपन से ही ये धर्म भेदभाव, गरीबी अमीरी जैसी चीजों को बदलना चाहते थे। एक समय अमेरिका में एक धर्म संबधित कार्यक्रम होने वाला है, जिसमे कोई धर्म भेदभाव जैसी चीज नही है, तो स्वामीजी को लगा की ये अच्छा मोका है की अमेरिका जाकर इसके बारेम बात की जाए। स्वामी जी अमेरिका चले गए और वहा जाकर Relegion Parlament के शो में गए और वहा इस शो में कमसे कम 7000 लोग आए हुए थे।

स्वामी विवेकानंद का मूल मंत्र ये था की ” उठो जागो और तक तक मंजिल ना मिले तब तक प्रयास करते रहो”

स्वामी जी इतने लोगो को देख कर थोड़ा हिचक गए और उसने शो के लोगो को बोला की मुझे सबसे अंत स्टेज पर बुलाना, स्वामी जी सोचने लगे को में क्या बोलूंगा। पर जब स्वामी जी का स्टेज पर जाने की बारी आई तब वो गए और उसके पहले शब्द थे “Hello My American Brothers and Sisters” ये सुनके सभी लोगो ने खड़े हो कर स्वामी जी के लिए तालिया बजाई क्युकी उसको लगा की ये कोई अलग है। फिर स्वामी जी ने धर्म भेदभाव, गरीब आदमी अमीर आदमी और कल्चर के बारेमे बात करी।

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ये स्वामी जी की बात इतनी ज्यादा फेल गई और सभी मीडिया वाले स्वामी जी की हेडलाइन पेपर में छापने लगे, और इंडिया में स्वामी जी को काफी मान सम्मान मिलने लगा। अमेरिका में सभी लोगो को काफी अच्छा लगा और सभी लोग ने स्वामी जी की अमेरिका में मदद करना शुरू कर दिया, पर स्वामी जी इन सब पर निर्भर नहीं रहना चाहते थे तो उसने न्यू यॉर्क, वॉशिंटन जैसी सिटी में लेक्चर देना शुरू कर दिया जिस से उसको पैसे मिलने लगे।

स्वामी जी जब भारत वापिस आए तो काफी लोगो उसका स्टेशन पर इंतजार करते थे की स्वामी जी एक बस एक झलक उसको दिखी जाय, सभी लोग शोक में थे की ये एक साधु है जिसके पास ना तो पैसे है और ना तो घर फिर भी कितनी आगवी सोच रखते है।

भारत वापिस आने के बाद स्वामी जी सभी को यही कहते थे की कोई भूखा है तो उसे खाना दो, कोई बीमार है तो उसे दवाई दो, किसी को मदद की किसी भी तरह से जरूर है तो उसकी मदद करो।

स्वामी विवेकानंद जीवन परिचय
स्वामी विवेकानंद जीवन परिचय

भारत आने के बाद वो काफी जगह गए और अपनी बाते लोगो को सुनाई, उसके थोड़े समय बाद स्वामी जी की तबियत थोड़ी बिगड़ ने लगी और जब डॉक्टर को दिखाया तो उसने कहा की आपको अस्थमा है। पर स्वामी जी बीमारियों में ज्यादा मानते नही थे उसने फिर भी अपना काम करना शुरू रखा। डॉक्टर ने कहा की आप नॉर्थ ईस्ट चले जाओ वहा का वातावरण अस्थमा के लिए ठीक रहेगा। स्वामी जी नॉर्थ ईस्ट चले गए।

नॉर्थ ईस्ट में स्वामी जी ने काफी सारे राज्यो में लेक्चर दिया और लोगो को कहा अगर कोई पढ़ाई कर रहा है तो उसको पुस्तक ज्ञान ही मत दो, उसको अपने देश से प्यार करना भी शिखाओ।

Swami Vivekanand Death (स्वामी विवेकानंद का मृत्यु) :

अस्थमा की वजह से दिन भर दिन स्वामी जी की हालत काफी गंभीर हो जा रही थी वो बहुत थक जा रहे थे। जब वो नॉर्थ ईस्ट के बाद बेलूर मठ आए, शाम के 7 बजे जब आरती का समय हुआ तो स्वामी जी अपने कमरे में चले गए और उसने दूसरे साधु को कहा की में बहुत थका हुआ महेसुस कर रहा हु इसीलिए मेरे कमरे में आप थोड़े समय के लिए मत आए।

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उसी शाम के 9 बजे स्वामी जी ने अपने अंतिम सांस लिए और इस दुनिया को अलविदा कह कर चल बसे। तो ये थी स्वामी विवेकानंद की कहानी, में आशा करता हु की आपको पसंद आई होगी अगर कोई लिखने में भूल रह गई होय तो माफी चाहता हु।

Conclusion :

Hello, People मेरा नाम Alpesh है और में गुजरात से बिलॉन्ग करता हु, तो हमने इस Article मे हमने Swami Vivekanand की शुरुआत से लेकर उसकी मृत्यु तक की जर्नी के बताई ये आपको पसंद आई होगी।

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FAQ :

Q. स्वामी विवेकानंद ने श्री रामकृष्ण से अपनी पहली मुलाकात में क्या पूछा था?

Ans : स्वामी विवेकानंद ने श्री राम कृष्ण को ये पूछा था की, स्वामी जी क्या आपने भगवान को देखा है।

Q. स्वामी विवेकानंद के जीवन से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

Ans : स्वामी विवेकानंद के जीवन से सबसे बड़ी शिक्षा यही मिलती है की सभी की मदद करो, किसी से भी धर्म भेदभाव ना रखो।

Q. विवेकानंद के मूल मंत्र क्या थे?

Ans : स्वामी विवेकानंद का मूल मंत्र ये था की उठो जागो और अपनी मंजिल ना मिले तब तक मत रुको।

Q. स्वामी विवेकानंद क्यों प्रसिद्ध है?

Ans : स्वामी विवेकानंद अपने जीवन में किए गए कार्यों जिसमे काफी सारे काम किए है जैसे की धर्म भेदभाव मत रखो, सबकी मदद करो ऐसी कई सारे काम की वजह से लोग उसको काफी पसंद करते है।

Q. क्या स्वामी विवेकानंद भगवान में विश्वास करते हैं?

Ans : स्वामी विवेकानंद भगवान में अत्यंत विश्वास करते थे।

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